Sweet Zannat MMS वीडियो:– सोशल मीडिया पर वायरल होने वाली क्लिप्स की रफ्तार लगातार बढ़ रही है, लेकिन इनके साथ भ्रम और गलत दावे भी तेजी से फैल जाते हैं। नवंबर 2025 में एक लगभग 19 मिनट का MMS वीडियो अचानक इंटरनेट पर वायरल हो गया, जिसे कई यूजर्स ने एक इंस्टाग्राम कपल का बताया। वीडियो को लेकर तरह-तरह के दावे किए गए, लेकिन जांच और फैक्ट चेक से साफ हो गया कि यह वीडियो असली नहीं बल्कि AI-जनरेटेड डीपफेक है। सबसे महत्वपूर्ण बात—इस पूरे मामले का Sweet Zannat से कोई संबंध नहीं है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मेघालय की कंटेंट क्रिएटर स्वीट जन्नत (Sweet Zannat) ने खुद आगे आकर इस विवाद को क्लियर किया। उन्होंने कहा कि वीडियो में दिख रही लड़की वे नहीं हैं और उन्हें इस वायरल कंटेंट से जोड़ना गलत है। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर फैली गलतफहमी को कम करने में काफी मददगार रहा। यह पूरा मामला याद दिलाता है कि वायरल होना हमेशा सच होने की गारंटी नहीं होता, इसलिए हर यूजर के लिए फैक्ट चेक करना और ऐसी सामग्री को बिना जांच के शेयर न करना बेहद जरूरी है।
Sweet Zannat कौन हैं?
‘स्वीट जन्नत’ (Sweet Zannat) मेघालय के महेंद्रगंज की एक लोकल सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर हैं। वह आमतौर पर डेली लाइफ और रोजमर्रा के वीडियो पोस्ट करती हैं, और उनका इंस्टाग्राम यूजरनेम @sweet_zannat_12374 है। नवंबर 2025 में इंटरनेट पर एक वायरल MMS वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने गलती से उन्हें हीरोइन मान लिया, जिससे उनके खिलाफ सोशल मीडिया पर भ्रम और गलतफहमियां फैल गईं।
28 नवंबर 2025 को जन्नत ने एक क्लैरिफिकेशन वीडियो शेयर कर साफ किया कि वह वायरल वीडियो की लड़की नहीं हैं। उन्होंने मजेदार अंदाज में कहा कि वीडियो का मामला उनका नहीं है, और वीडियो पूरी तरह फेक है। उनके इस बयान ने सोशल मीडिया पर फैली गलतफहमी को काफी हद तक कम किया और फॉलोअर्स के बीच उनकी ईमानदारी और साहस को भी सराहा गया।
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19 मिनट MMS वीडियो का सच
सोशल मीडिया पर वायरल हुए 19 मिनट लंबे वीडियो की सच्चाई फैक्ट चेक से सामने आई है। जांच में पाया गया कि यह वीडियो AI-जनरेटेड डीपफेक है और इसमें Sweet Zannat शामिल नहीं हैं।
वीडियो का मेघालय या किसी इंस्टाग्राम कपल से कोई आधिकारिक संबंध नहीं है। इसके बावजूद, सोशल मीडिया पर इसे असली दिखाने की कोशिश की गई थी। इस प्रकार के डीपफेक वीडियो के खिलाफ साइबर सेल ने चेतावनी जारी की है, और IT एक्ट 66E के तहत ऐसे मामलों में 3 साल तक की जेल का प्रावधान है। यह घटना दर्शाती है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को हमेशा सत्यापित करने की जरूरत है और किसी भी कंटेंट पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए।
सोशल मीडिया पर फैलाव कैसे हुआ?
यह वीडियो सबसे पहले अनवेरिफाइड इंस्टाग्राम और टेलीग्राम चैनल्स पर शेयर किया गया। इसके बाद यह व्हाट्सएप ग्रुप्स और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल गया।
कुछ यूजर्स ने वीडियो को असली बताया, तो वहीं कुछ ने इसे ‘हॉट कंटेंट’ के रूप में प्रमोट किया। हालांकि फैक्ट चेक से स्पष्ट हुआ कि असली इंस्टाग्राम कपल ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, जिससे यह साबित होता है कि वीडियो का वायरल होना पूरी तरह फेक और गलतफहमी पर आधारित था।
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कैसे बचें वायरल डीपफेक और प्राइवेसी रिस्क से?
सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो और कंटेंट से अपनी प्राइवेसी और सुरक्षा बचाना बेहद जरूरी है। इसके लिए कुछ आसान कदम अपनाए जा सकते हैं:
- वीडियो या पोस्ट शेयर करने से पहले जांच करें कि यह असली है या फेक।
- AI टूल्स का इस्तेमाल करें, जैसे Hive Moderation, ताकि डीपफेक या फर्जी वीडियो की पहचान की जा सके।
- अगर आप किसी वायरल वीडियो का टारगेट हैं, तो तुरंत साइबर सेल (1930) को रिपोर्ट करें।
- सोशल मीडिया पर हर जानकारी पर आंख बंद करके भरोसा न करें और फैक्ट चेक करना हमेशा प्राथमिकता बनाएं।
इन सरल उपायों को अपनाकर आप फेक वायरल वीडियो और प्राइवेसी रिस्क से खुद को सुरक्षित रख सकते हैं।
निष्कर्ष
Sweet Zannat की साहस और क्लैरिफिकेशन ने सोशल मीडिया पर फैली गलतफहमी को काफी हद तक दूर किया। यह मामला हमें याद दिलाता है कि वायरल कंटेंट का मतलब हमेशा सच्चाई नहीं होता। 2025 में वायरल MMS और AI-जनरेटेड डीपफेक वीडियो तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए सोशल मीडिया लिटरेसी और फैक्ट चेक करना हर यूजर के लिए जरूरी बन गया है।
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