दिल्ली में कहां-कहां खुलीं ‘अटल कैंटीन’? 5 रुपये में खाना कब और किस समय मिलेगा

अटल कैंटीन

महंगाई के इस दौर में दिल्ली के गरीब, दिहाड़ी मजदूरों और जरूरतमंद लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। राजधानी में अटल कैंटीन योजना दिल्ली की औपचारिक शुरुआत कर दी गई है, जिसके तहत अब लोगों को सिर्फ 5 रुपये में पौष्टिक और भरपेट भोजन मिल रहा है। इस योजना से उन लोगों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा, जो रोजमर्रा की मेहनत के बाद सस्ते और साफ भोजन की तलाश में रहते हैं।

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दिल्ली अटल कैंटीन योजना की शुरुआत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर की गई है। पहले चरण में राजधानी के अलग-अलग इलाकों में 45 अटल कैंटीन शुरू की गई हैं, जबकि आने वाले समय में इनकी संख्या बढ़ाकर 100 तक करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि योजना का विस्तार चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा ताकि हर जरूरतमंद तक यह सुविधा पहुंच सके।

योजना के शुभारंभ के मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने स्वयं एक अटल कैंटीन का दौरा किया और वहां 5 रुपये की थाली की गुणवत्ता, साफ-सफाई और व्यवस्थाओं की समीक्षा की। सरकार का उद्देश्य साफ है—अटल कैंटीन योजना दिल्ली के जरिए यह सुनिश्चित करना कि कोई भी जरूरतमंद व्यक्ति भूखा न रहे और सभी को सम्मानजनक भोजन मिल सके।

दिल्ली में कहां-कहां खुली हैं अटल कैंटीन?

अटल कैंटीन को राजधानी के अलग-अलग इलाकों में रणनीतिक रूप से खोला गया है, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका लाभ मिल सके। प्रमुख स्थान इस प्रकार हैं:

  • नरेला (सेक्टर A-6, होलांबी कलां)
  • बवाना (शाहबाद दौलतपुर, SRS बवाना)
  • आदर्श नगर, शालीमार बाग, वजीरपुर
  • तिमारपुर, शकूरबस्ती, मंगोलपुरी
  • राजौरी गार्डन, मादीपुर, शकूरपुर
  • मोती नगर, राजिंदर नगर
  • विकासपुरी, मटियाला, द्वारका
  • नजफगढ़, पालम
  • महरौली, आरके पुरम
  • छतरपुर (शांति कैंप, भाटी माइंस)

इन इलाकों में बड़ी संख्या में मजदूर और कम आय वाले लोग रहते हैं, जिन्हें इस योजना से सीधा फायदा मिल रहा है।

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अटल कैंटीन में क्या-क्या भोजन मिलेगा?

अटल कैंटीन योजना दिल्ली के तहत लोगों को बेहद कम कीमत में संतुलित और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। सरकार का फोकस सिर्फ सस्ता खाना देना नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और पोषण से भरपूर थाली देना है।

सिर्फ 5 रुपये में मिलने वाली इस थाली का वजन लगभग 600 ग्राम होगा, जिसमें शामिल हैं:

  • 4 ताज़ी और गर्म रोटियां
  • पौष्टिक दाल
  • मौसमी सब्जी
  • चावल
  • स्वाद के लिए अचार

हर अटल कैंटीन में एक समय पर करीब 500 लोगों को भोजन देने की व्यवस्था की गई है। भोजन की साफ-सफाई, गुणवत्ता और पोषण स्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि जरूरतमंदों को सम्मान के साथ अच्छा खाना मिल सके।

यह पहल खासतौर पर दिहाड़ी मजदूरों, गरीबों और कामकाजी लोगों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है, जो कम खर्च में भरपेट और संतुलित भोजन चाहते हैं।

अटल कैंटीन में भोजन मिलने का समय क्या है?

अटल कैंटीन योजना दिल्ली को खास तौर पर दिहाड़ी मजदूरों, कामगारों और जरूरतमंद लोगों की दिनचर्या को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसी वजह से भोजन का समय भी ऐसा रखा गया है, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग इसका लाभ उठा सकें।

अधिकांश अटल कैंटीनों में भोजन के तय समय इस प्रकार हैं:

  • दोपहर का भोजन: दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक
  • रात का भोजन: शाम 6 बजे से रात 9 बजे तक

हालांकि, कुछ क्षेत्रों में स्थानीय जरूरतों के अनुसार समय में थोड़ा बदलाव भी किया गया है। वहां भोजन इन समयों पर उपलब्ध कराया जा रहा है:

  • दोपहर: सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक
  • रात: शाम 6:30 बजे से रात 9:30 बजे तक

इस लचीले समय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि काम से लौट रहे मजदूर, रिक्शा चालक और अन्य श्रमिक आसानी से 5 रुपये में मिलने वाले पौष्टिक भोजन का लाभ उठा सकें, बिना किसी परेशानी के।

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अटल कैंटीन में टोकन व्यवस्था कैसे काम करेगी?

अटल कैंटीन योजना में भीड़ को नियंत्रित करने और भोजन वितरण को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए एक डिजिटल टोकन सिस्टम लागू किया गया है। इस व्यवस्था का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर जरूरतमंद व्यक्ति को समान अवसर पर भोजन मिल सके।

टोकन लेने की प्रक्रिया कुछ इस तरह होगी:

  • टोकन जारी करने से पहले लाभार्थी की फोटो ली जाएगी और उसका नाम दर्ज किया जाएगा
  • एक व्यक्ति को एक समय में केवल एक ही टोकन दिया जाएगा
  • दूसरा टोकन प्राप्त करने के लिए कम से कम 3 घंटे का अंतर जरूरी होगा

इस सिस्टम से न सिर्फ फर्जी लाभ पर रोक लगेगी, बल्कि यह भी तय होगा कि सीमित संसाधनों में अधिकतम लोगों तक 5 रुपये में पौष्टिक भोजन पहुंच सके।

सरकार का मानना है कि यह टोकन व्यवस्था अटल कैंटीन को पारदर्शी, व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने में अहम भूमिका निभाएगी, जिससे मजदूरों और जरूरतमंद लोगों को बिना किसी अफरा-तफरी के भोजन मिल सके।

गरीबों और मजदूरों के लिए क्यों खास है अटल कैंटीन?

अटल कैंटीन योजना दिल्ली के उन लाखों लोगों के लिए एक बड़ी राहत बनकर सामने आई है, जो रोज़ मेहनत तो करते हैं लेकिन महंगे खाने का खर्च नहीं उठा पाते। दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, निर्माण कार्य में लगे कामगार और बेघर लोग अक्सर पौष्टिक भोजन से वंचित रह जाते हैं। ऐसे में सिर्फ 5 रुपये में भरपेट और संतुलित खाना मिलना उनके लिए किसी सहारे से कम नहीं है।

इस योजना के जरिए सरकार ने न सिर्फ सस्ता भोजन उपलब्ध कराया है, बल्कि जरूरतमंद लोगों को सम्मान के साथ खाने की सुविधा भी दी है।

अटल कैंटीन के प्रमुख फायदे:

  • दिहाड़ी मजदूरों को रोज़ाना कम खर्च में पौष्टिक भोजन
  • बेघर और जरूरतमंद लोगों को सम्मानजनक और सुरक्षित खाने की जगह
  • रात में काम करने वाले श्रमिकों को सस्ती और भरोसेमंद डिनर सुविधा
  • संतुलित आहार से स्वास्थ्य और पोषण में सुधार
  • महंगाई के दौर में गरीब वर्ग को आर्थिक राहत

सरकार का मानना है कि अटल कैंटीन योजना केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सुरक्षा, पोषण और मानव गरिमा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। यही वजह है कि यह योजना गरीबों और मजदूरों के लिए बेहद खास मानी जा रही है।

निष्कर्ष

अटल कैंटीन योजना दिल्ली के गरीब, मजदूर और जरूरतमंद वर्ग के लिए एक सराहनीय और संवेदनशील पहल है। महंगाई के इस दौर में सिर्फ 5 रुपये में पौष्टिक और भरपेट भोजन उपलब्ध कराकर सरकार ने यह साबित किया है कि सामाजिक कल्याण योजनाएं ज़मीन पर भी असर दिखा सकती हैं।

यह योजना न केवल भूख की समस्या को कम करने में मदद करती है, बल्कि दिहाड़ी मजदूरों, बेघर लोगों और कम आय वर्ग को सम्मान के साथ भोजन करने का अवसर भी देती है। टोकन व्यवस्था, तय समय और पौष्टिक थाली जैसी सुविधाएं इसे पारदर्शी और भरोसेमंद बनाती हैं।

आने वाले समय में अगर अटल कैंटीन की संख्या और बढ़ती है, तो यह योजना दिल्ली में भूख और कुपोषण के खिलाफ एक मजबूत ढाल साबित हो सकती है। कुल मिलाकर, अटल कैंटीन सिर्फ एक भोजन योजना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों के लिए उम्मीद और राहत का प्रतीक बनकर उभर रही है।

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